आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए कौन सा योगा करें?

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दोस्तो जैसा कि आप जानते हैं कि आँखें हमारे शरीर की कितनी महत्वपूर्ण अंग हैं. अगर ये थोड़ी सी डिस्टर्व हो जाती है तो हमें कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसलिए हमें अपनी आँखों की बहुत ज्यादा देखभाल करनी पड़ी है.



आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए कौन सा योग करें?

- आजकल के खानपान में मिलावट बहुत अधिक तेजी से फैल रहा है जिससे हमारे शरीर में कई तरह की बाधाएँ उत्पन्न हो जाती हैं. और यहाँ तक कि कम उम्र के बच्चों की आँखें भी जल्दी खराब हो जाती हैं. और यह सब दूषित भोजन के कारण ही होता है.

- और इसके अलावा आजकल के डिजिटल दुनिया में सारा काम ऑनलाइन हो रहा है जिसमें नए युवकों को पूरे दिन कम्प्यूटर के सामने बैठकर काम करना होता है जिससे आँखों में बुरा प्रभाव पडता है.

- तो ऐसे में हमें कोशिश करनी चाहिए कि दूषित खानपान से बचें. और अपने शरीर का ध्यान रखना चाहिए. हमें अपनी आँखों तथा पूरे शरीर का ख्याल रखने के लिए कुछ योगासन भी करने चाहिए जिससे हमारा शरीर हेल्थी बनता है.

- आज हम आपके लिए लेकर आए हैं आँखों की रोशनी बढ़ाने के लिए बेस्ट योगा. जिससे आपको आँखों में एक अच्छा और नया परिणाम देंगे. 

आगे बढ़ने से पहले कुछ महत्वपूर्ण जानकारी ले लेते हैं।

योग का अर्थ क्या है?

योग परिचय:

योग एक स्वस्थ जीवन जीने की कला तथा तन-मन को निर्मल, निरोगी एवं स्वस्थ रखने का विज्ञान है। योगाभ्यास दैनिक तनाव से विद्यार्थी को मुक्त कर अपनी शक्ति के व्यर्थ व्यय से बचाता है।

ज्ञान ग्रहण करने के लिए एकाग्रता की आवश्यकता होती है, योग एकाग्रता प्राप्ति का साधन है। योग विद्यार्थी जीवन को अनुशासित एवं सुसंस्कारित बनाकर उसकी अंतःशक्तियों को जागृत करता है।


[आंखों के लिए कौन सा योग सबसे अच्छा है?]

[2023] आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए कौन सा योग करें? || [आंखों के लिए कौन सा योग सबसे अच्छा है?]


आँखों के लिए योगासन :

तो चलिए अब आपको आँखों के लिए बेस्ट योगासन के बारेें जानकारी देते हैं.

मंडूकासन:

[2023] आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए कौन सा योग करें? || [आंखों के लिए कौन सा योग सबसे अच्छा है?]


मंडूक अर्थात मेंढक, मेंढक के बैठने जैसी आकृति बनने के कारण इस आसन को मंडूक आसन कहा जाता है।

विधि-

  • वज्रासन में बैठ जाए।
  • दोनों हाथों की मुट्ठी बांधकर नाभि (पेट) के अगल-बगल स्थापित करें।
  • श्वास छोड़ते हुए यथाशक्ति (क्षमता के अनुसार) सामने की ओर झुकें।
  • सामने की ओर देखते हुए यथासंभव (क्षमता के अनुसार) रुकें।
  • जब सांस लेने की इच्छा हो तो पूर्व स्थिति में वापस आ जाएँ (वज्रासन में सीधे बैठ जाएँ)।
  • शुरुआत में 3 से 5 बार जरूर करें। धीरे-धीरे इसकी क्रिया को बढ़ाते जाएँ।

लाभ-

  • नेत्र ज्योति बढ़ाने में सहायक है
  • चेहरा कांतिवान (सुंदर) बनता है
  • पेट से संबंधित विकार दूर होते हैं
  • पेट की स्थूलता दूर होती है
  • पाचन शक्ति बढ़ती है
  • मधुमेह रोग में लाभदायक है

सावधानियां-

अल्सर रोग में ना करें। उच्च रक्तचाप एवं हृदय रोगी ना करें। पेट में किसी प्रकार की शल्यक्रिया हुई हो, तो इस आसन को नहीं करना चाहिए।

नोट- आगे झुकते समय पीछे से पैर व नितम्ब नहीं उठना चाहिए। ऑर माथा जमीन पर नहीं लगना चाहिए।


आंखों के लिए क्रिया -

आंखों की इस क्रिया में गर्दन सीधी और स्थिर रखें. क्रिया के समय गर्दन को किसी प्रकार की गति ना दें. आंखों की इन क्रियाओं को सात भागों में विभाजित किया गया है -

📢 कृपया ध्यान दीजिए :

योगासन की विधि में कुछ ऐसे वर्ड मौजूद हैं जिनका मतलब शायद आपको पता ना हो तो हम आपको बता देते हैं। (स्वांस को भीतर खींचना पूरक कहलाता है, और स्वांस को बाहर निकालना रेचक कहलाता है तथा स्वांस को अंदर खींचकर रोके रहना कुंभक कहलाता है।)


1.

  • पूरक करते हुए आंखों के गोलकों को ललाट की ओर ले जाते हुए आकाश को देखें।
  • रेचक करते हुए आंखों के गोलकों को नीचे की ओर जाते हुए पंजे की ओर देखें. इसी तरह 5 बार करें।

2.

  • पूरक करते हुए आंखों के गोलक को दाई ओर ले जाएं.
  • रेचक करते हुए गोलकों को बाईं ओर ले जाएँ। जितना पीछे की ओर देख सकें, देखें। इसी तरह 5 बार करें।

3.

  • पूरक करते हुए दोनों गोलकों को दाहिने कोंण में ऊपर ले जाएँ.
  • रेचक करते हुए गोलकों को बाएँ कोंण में ले जाएं. यह तिरछी कोंणात्मक प्रिया है. इसे 5 बार दोहराएँ।

4.

  • पूरक करते हुए दोनों गोलक को बाएँ कोंण में ऊपर ले जाएं।
  • रेचक करते हुए दोनों गोलक को दाएं कोण में नीचे लाएं. इसी तरह 5 बार करें।

5.

  • पूरक करके कुंभक करें, फिर आंखों के गोलको को गोलाकार दाएं से बाएं घुमाएँ. इस तरह 5 बार करें।
  • इसी क्रिया को बाएं से दाएं गोलाकार घुमाएँ। इसे भी 5 बार करें।

6.

  • रेचक करके कुंभक करें। आंखों को तेजी से झपकाएँ।
  • अब पूरक करें तथा तथा पुनः रेचक करके कुंभक करें। तेजी से आंखों को झपकाएँ।

7.

  • दोनों हाथों को आपस में घर्षण करके गर्म करें
  • रेचक करके हल्के स्पर्श से हथेलियों द्वारा आंखों पर मालिश करें।
  • हथेलियों का संपुट बनाकर आंखों को खुली रखकर अंधेरे में तेजी से झपकाएँ।
  • उंगलियों के बीच से आते हुए प्रकाश को देखें. धीरे-धीरे उंगलियों को ऐसे खोलते जाएँ जिससे पूरा प्रकाश हो जाए।

सावधानियां:
  • आंखों को तेज धूप एवं हवा से बचाएं।
  • धूल और धुएं से आंखों की सुरक्षा करें।
  • चलते हुए ना पढ़ें. लेटकर कम रोशनी में ना पढ़ें।
  • चलते हुए वाहन में बैठकर ना पढ़ें।

लाभ:
आंखों के रोग दूर होते हैं।
आंखों की रोशनी बढ़ती है।
चश्मे का नंबर नहीं बढ़ता एवं धीरे-धीरे चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती।


तो दोस्तों यह थे आंखों की रोशनी बढ़ाने का एक योगासन। आप ऊपर दिए गए योगासन को अपनी जीवन सफर में रोजाना करते रहे तो आंखों की सुरक्षा बनी रहती है। इसके अलावा अपने दैनिक जीवन में खान-पान का भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

आँखों की सुरक्षा के लिए दैनिक रुटीन

तो अब हम आपको योगासन के अलावा दूसरी जानकारी बताते हैं जिससे आँखों की सुरक्षा की जा सकती है।

1. सोने के समय का रुटीन सेट करें

हमारे स्वास्थ्य के लिए यह एक जरुरी हिस्सा है जिसे हम इग्नोर कर देते हैं। हमें रात में जादा देर तक नहीं जागना चाहिए। कम से कम 11 बजे से पहले ही हरहाल में सो जाना चाहिए। और सुबह 5 बजे हरहाल में जागना चाहिए। इस तरह जीवन में टाइम टेबल बनाकर चलने से स्वास्थ ठीक रहता है।

2. जादा से जादा पानी पीएँ

दैनिक जीवन में पानी की कमी करने से डिहाईड्रेशन हो सकता है। अधिक नमक खाने पर प्यास जादा लगती है। अगर पानी कमी कर दी तो आँखों में सूजन आ सकती है। इसलिए हमें जादा से जादा पानी पीना चाहिए।

3. आँखों को ठंडे पानी से धोएँ

यह सबसे बेस्ट उपाय है आँखों की सेहत के लिए। हर रोज सुबह उठकर अपनी आँखों पर ठंडे पानी के छीटे मारना चाहिए इससे आँखों पर ठंडक आती है। इसके अलावा मुँह में पानी भरकर भी आँखों छीटे मारकर आँखें धोना चाहिए।

लेकिन एक चीज ध्यान रखें कि पानी घड़े वाला या सीमेंट से बना कोई बर्तन वाला होना चाहिए। फ्रिज का ठंडा पानी कभी न लें, इससे फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।


धन्यवाद...

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