श्रवण कौशल से क्या अभिप्राय है? एवं श्रवण कौशल के विकास की विधियां कौन-कौन सी हैं?

1

बच्चों में श्रवण कौशल का विकास कैसे करें?

नमस्कार दोस्तों आज के इस आर्टिकल में आपको बताएंगे श्रवण कौशल के बारे में और श्रवण कौशल के विकास की विधि के बारे में। यह प्रश्न B.Ed. के हिंदी शिक्षण सब्जेक्ट से लिया गया है। इस प्रश्न के बारे में जानना आपको बहुत जरूरी है। तो आइए जानते हैं -

श्रवण कौशल से अभिप्राय

श्रवण कौशल से क्या अभिप्राय है? एवं श्रवण कौशल के विकास की विधियां कौन-कौन सी हैं?

भाषण और श्रवण प्राथमिक भाषाई कौशल है, लेखन और वाचन गोण हैं। बच्चों को प्रारंभ से ही भाषा को सुनकर उसे ध्वनियों का विभेद करने का कौशल विकसित करना चाहिए। वक्ता के बोलने के साथ उसके भावों को भी पहचानने की क्षमता का विकास होना आवश्यक है -

व्यतिरेकी ध्वनियों को पहचानना

व्यतिरेकी ध्वनि अर्थात विभिन्न धनियाँ। हिंदी में स्वर और व्यंजन में जो विभिन्न ध्वनियाँ हैं उनको सुनकर समझना तथा उनमें आवश्यक अंतर को पहचानने की क्षमता का विकास करना पढ़ाने का लक्ष्य होना चाहिए। ह्रस्व दीर्घ का ज्ञान, श, ष, स का सही उच्चारण, व और ब, छ और क्ष, ऋ का सही उच्चारण, ण और न में अंतर आदि ध्वनियों का ठीक ज्ञान कराया जाना चाहिए।

श्रवण के साथ उच्चारण की शुद्धता तथा उसमें पाए जाने वाले दोष जैसे क्षेत्रीयता या ग्राम्य उच्चारण (स्कूल, सकूल, पानी पाणी) असावधानी या शीघ्र उच्चारण के कारण पाए जाने वाले दोष (मास्टर साहब, मास्साब) से बालकों को सावधान करना चाहिए।

श्रवण कौशल के विकास की विधियां

6 से 8 माह का बच्चा शब्दों को ध्यान से सुनता है तथा वैसा बोलने का प्रयास करता है। माँ बोलचाल द्वारा, भाव भंगिमा द्वारा और विभिन्न क्रियाओं द्वारा भाषा के विकास में बच्चे की सहायता करती है। 12 माह का बच्चा सुनता, समझता और संबंध स्थापित करने लगता है। डेढ़ से 2 साल का बच्चा सुनने और बोलने के प्रति जिज्ञासु होता है।

5 से 6 वर्ष का बच्चा इतनी शब्दावली ग्रहण कर लेता है कि वह सरल वाक्य का प्रयोग कर सकता है तथा शब्दों में समानता तथा अंतर को समझ सकता है। जब बालक पहली बार प्राथमिक विद्यालय में जाता है तो उसे अन्य बच्चों के बीच अपरिचित होने से डर लगता है। उसकी इस झिझक को आत्मीय बातचीत से दूर करना चाहिए।


वैसे प्रारंभ में भाषा की शुद्धता पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं होती, किंतु बालकों की झेंप मिट जाने पर शिक्षक को चाहिए कि वह उन्हें शुद्ध, मानक और साहित्यिक भाषा बोलने के लिए प्रेरित करें।


धन्यवाद.....

एक टिप्पणी भेजें

1टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
एक टिप्पणी भेजें

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !